रमजान का चांद देखने के लिए बेकरारी, रोजे की तैयारी

रमजान का चांद देखने के लिए हर मुस्लिम बेकरार है। शनिवार को चांद दिख सकता है। चांद दिखते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी। इफ्तार व सहरी के लिए बाजारों में लोगों ने खरीदारी की। लेकिन महंगाई की मार से परेशान दिखे।

रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। यह मुस्लिमों के लिए बेहद खास है। सुबह सेहरी खाकर रोजा रखा जाता है और शाम को इफ्तारी से रोजा खोला जाता है। पुराना शहर, सैलानी, शाहबाद, जगतपुर, किला, जसौली, सौदागरान अन्य मोहल्लों में लोगों ने सिवईं, चिप्स, चना, खजूर, मटर, बेसन, सूजी, मैदा आदि की खरीदारी की। दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि शनिवार को रमजान के चांद देखा जाएगा। इसके बाद ही दरगाह से ऐलान होगा।

महंगाई बिगाड़ेगी रमजान के पकवानों का जायका

रमजान के महीने में इस बार महंगाई ने पकवानों का जायका बिगड़ रखा है। दुकानदार नन्हे शमसी ने कहा कि इस साल महंगाई की मार पड़ेगी। चने की दाल की कीमत पहले 80 रुपये में थी। अब 120 रुपये प्रति किलो बिक रही है। दुकानदार शादाब का कहना है कि उम्मीद थी कि कोरोना काल के बाद महंगाई कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। तेल, दाल, बेसन की कीमतें ज्यादा हैं। ग्राहक मुजाहिद इस्लाम, हुमैर ने बताया कि खाद्य तेल, देशी घी आदि की लगातार बढ़ रही कीमतों के बीच अब हर घर की रसोई में प्रयोग होने वाले मसालों के दाम में भी बढ़ गए हैं। बीते एक पखवाड़े के दौरान मसालों के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यही हाल सूखे मेवों का भी है। रमजान का माह शुरू होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही बादाम, काजू, अखरोट आदि के दाम में भी महंगे हो गए हैं।