आयूष डॉक्टरों की आंखों में खुशी के आंसू छलके

AYUSH AMENDMENT GAZETTE 3 081015
लखनऊ
चेहरे पर बड़ी खुशी, आंखों में खुशी के आंसू और हाथों में जीत का दम… प्रदेश के हज़ारों आयूष डॉक्टरों को ये खुशी का मौका उनकी मेहनत और कुर्बानियों से मिला है। खुशी इतनी की बात करने के लिए ज़बान पर लफ्ज़ नहीं आ रहे हैं। दरअसल ऐसा इसलिए है कि उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिसिन (संशोधन) अधिनियम- 2015 को कानूनी शक्ल मिल गई है। इस अधिनियम का सरकारी गजट आ गया है। आज लखनऊ के जनपद सचिवालय पर गजट की मिलते ही आयूष डॉक्टरों ने राहत की लंबी सांस ली।
नीमा के ज़िला अध्यक्ष और इस लड़ाई में आगे रहने वाले डॉ मोईद अहमद कहते हैं कि एक्ट में संशोधन की मांग बहुत पुरानी थी, लड़ाई भी लड़ी जा रही थी। पर पिछले 4 साल से हमलोग रात दिन सिर्फ कानून में संशोधन के बारे में सोचते थे। समझ में नहीं आता था कि कब वो दिन आएगा जब हमें हमारा हक मिलेगा। डॉ मोईद बताते हैं कि सरकारी गजट आने की खबर तो मिल गई थी, बस आंखों को यकीन दिहानी कराने के लिए गजट को एक नज़र देखना था। किसने मदद की… इस सवाल पर वो सैकड़ों लोगों का नाम लेकर शुक्रिया अदा करते हैं। कहते हैं कि सभी राजनीतिक दलों के लोग, सांसद, विधायक से लेकर शहर के मौलाना तक… सभी ने हमारा साथ दिया। जितने नाम हैं सब याद है. सबसे मिलेंगे… शुक्रिया भी तो अदा करना है।
सीएम अखिलेश यादव के साथ आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल
सीएम अखिलेश यादव के साथ आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल
सीएम अखिलेश यादव का ज़िक्र करते ही डॉ मोईद थोड़ा खामोश होते हैं, फिर तेज़ आवाज़ में कहते है कि किस लफ़्ज़ में उनका शुक्रिया अदा करूं, अलफ़ाज़ तो खोजे नहीं मिल रहें हैं। हमारे सीएम नौजवान है, हमारी बातों को सुना, हमारे दर्द को उन्होंने करीब से समझा। जब भी मिलने गए, वो दिल से मिले। इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए कई तरह की बाधाएं थी, पर ये सिर्फ समाजवादी सीएम अखिलेश यादव ही कर सकते थे, और उन्होंने कर दिखाया। अब आगे क्या… इस सवाल का जवाब डॉ मोईद तपाक से देते हैं… पहले तो धन्यवाद रैली करेंगे फिर एक बड़ा कार्यक्रम करके सीएम का सम्मानित करेंगे। उम्मीद है कि सीएम अखिलेश यादव जल्द ही कार्यक्रम के लिए वक्त देंगे।
आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले डॉ जे पी पाण्डेय भी सचिवालय पर मौजूद थे। कहते हैं कि धरना-प्रदर्शन, जुलूस से लेकर लाठी चार्ज तक। सब सहा है हम लोगों ने। हम सिर्फ अपना हक मांग रहे थे। वो हमें मिला गया। डॉ अतीक अहमद अभी हज करके लौटे हैं, इस आंदोलन में काफी सक्रिय थे। कहते हैं कि हम वक्त यही दुआ की कि हमें अपनी पहचान मिल जाए। डॉ विनय गुप्ता कहते हैं कि कई बार हम लोग निराश हो जाते थे पर अगले ही पल दुगनी एनर्जी के साथ फिर आगे बढ़ जाते थे।

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डॉ अब्दुल अहद भी इस लड़ाई में सक्रिय थे। जब सवाल किया कि इस अधिनियम से क्या एलोपैथ डॉक्टरों को एतराज़ नहीं होगा। डॉ अहद कहते हैं कि हमने मेडिकल में ये ही शपथ ली है कि मरीज़ की जान बचाना हमारा पहला काम हैं। अब इस बात से किसे एतराज़ होगा। यहां कोई लड़ाई का मुद्दा है ही नहीं। यहां सिर्फ लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हों ये बड़ा सवाल हैं। इससे तो फायदा प्रदेश की आम जनता को होगा और देश आगे बढ़ेगा।
जनपद सचिवालय में इसके अलावा डॉ अशोक पाण्डेय, डॉ मुगीर अहमद, डॉ रवि, डॉ एस एस अशरफ, और डॉ आर सी वर्मा मौजूद थे। गजट आने पर डॉ आसिफ, डॉ जावेद हसन बेग, डॉ ओबैदुल्ला, डॉ अलाउद्दीन, डॉ आमिर जमाल, नीमा समेत कई संगठनों और डॉक्टरों ने भी खुशी का इज़हार किया है।
आप को बता दें कि उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिसिन (संशोधन) विधेयक- 2015, 28 अगस्त को विधान सभा ने पास कर दिया था। इसके बाद ये विधेयक महामहिम राज्यपाल की मंज़ूरी के लिए भेजा गया। राज्यपाल राम नाइक ने 7 सितंबर को इसे मंज़ूरी दी। मंजूरी के बाद प्रदेश के आयुर्वेदिक और यूनानी डॉक्टरों को अंग्रेजी दवाई लिखने का अधिकार मिल गया है। प्रदेश के आयूष डॉक्टर कई सालों से ये मांग कर रहे थे।
संशोधन विधेयक के कानूनी शक्ल अख्तियार करने के बाद आयुर्वेदिक और यूनानी के पंजीकृत चिकित्सकों को जनहित में सीमित आधुनिक औषधियां (एलोपैथिक ड्रग्स) लिखने का अधिकार मिल गया है। दरअसल प्रदेश की वर्तमान सारकार की यह मंशा रही है कि प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और गुणवत्तापरक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक तरफ आधुनिक चिकित्सा विधा के चिकित्सकों की कमी है, वहीं काफी संख्या में भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक (आयुर्वेद और यूनानी डिग्री धारक) उपलब्ध रहते हैं।
आयुर्वेद/यूनानी चिकित्सकों द्वारा आधुनिक औषधियों के प्रयोग पर प्रतिबंध होने के कारण रोगियों को समुचित उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता था। महाराष्ट्र, हरियाणा इत्यादि प्रदेश सरकारों द्वारा आवश्यक विधायी संशोधन के माध्यम से अपने-अपने प्रदेशों में इन चिकित्सकों को आधुनिक औषधियों के प्रयोग का अधिकार दिया गया है। इसी को ध्यान में रखकर ये विधेयक पेश किया गया था जो अब कानून बन गया है। प्रदेश में इस समय करीब 70 हज़ार आयुर्वेद और 25 हज़ार यूनानी डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं जो पूरे प्रदेश खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहें हैं।

15 COMMENTS

  1. Liberty shouldn’t be used irrationally. Medical professionals who remember the oath of ethics should also remember the knowledge and pathy they taught. We are proud of our medical experts and the different roles they play towards the health and its safeguards. All the streams are wonderful and needs to be respected equally. Hence its a humble request to professionals that they should practice their own pathy more honestly, though they are at liberty to practice alopathy.
    With regards…..

  2. In Ayush many pathy but only Ayurveda and yunani have right to writen an allopathy medicine why not homeopathy interested can give that medicine since they are also comes in Ayush.

  3. Congratulations Pandey boss and moim boss
    Sir nivedan hai ki plz gajat disclose krke net m Dale kyo ki abhi confusion bana hai

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