लाखों अकीदतमंदों ने परम्परागत तरीके से अदा की नमाज़ “अलविदा”

अब्दुल अज़ीज़

बहराइच, यूपी
इस्लाम धर्म के मुताबिक वर्षों में सबसे अहमियत और बरकत का महीना रमज़ान है। रमज़ान का महीना धीरे धीरे अपने अंतिम पड़ाव की और बढ़ता जा रहा है और इस माह के आखरी शुक्रवार जिसे अलविदा के रूप में मनाया जाता है बल्कि इसे लोग छोटी ईद के तौर पर भी मानते हैं।

अलविदा की नमाज़ शांति पूर्वक संम्पन्न कराने के लिए इस्लामिक संघटनो के अलावा ज़िला और पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। अलविदा का ये पर्व आज जनपद में अपने परम्परा गत तरीके से सौहार्द पूर्ण वातावरण में शांति पूर्वक सम्पन्न हो गया। इस अवसर पर अकेले बहराइच ज़िले में लगभग 300 मस्जिदों में नमाज़ अलविदा अदा की गयी। इस नमाज़ में शहर में सबसे अधिक काजीपुरा स्थित शहर की जामा मस्जिद में नमाज़ियों की भीड़ देखी गयी। यहां मौलाना वलीउल्ला मजहिरी ने नमाज़ पढ़ाई।

दूसरी तरफ सैय्यद सालार मसऊद गाज़ी में बहराइच ज़िले के कोने कोने से आये लोगों ने नमाज़ अलविदा अदा की। इसके अलावा प्रमुख रूप से शहर के मुख्य बाज़ार की मशहूर मस्जिद नानपारा मस्जिद, मस्जिद आलम शहीद, कबाबची गली, सौदागर मस्जिद नाज़िर पुरा, मकबरा मस्जिद बड़ी हॉट समेत पूरे शहर की सैकड़ों मस्जिदों में लाखों लोगों ने नमाज “अलविदा” अदा की। इस दौरान नमाज़ियों ने मुल्क, मिल्लत और अपनी व अपने अहले खानदान की फ़लाह और बहबूदी के लिए दुआएं मांगी।

अलविदा की वजह से शहर की बाज़ारों में भी आज खास भीड़ व रौनक देखी गयी। यहाँ लोगों ने ईद के इस खास और पावन पर्व के लिए जम कर खरीदारी की। आज के दिन खास कर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस की भूमिका काफी संदिग्ध दिखाई पड़ी। क्योंकि ईद की वजह से शहर की एकमात्र बाज़ार में काफी भीड़ होती है। यहां लोगों को पैर रखने की भी जगह नही मिलती है और इस अपार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की भी जरूरत रहती है, लेकिन यहां पुलिस विभाग द्वारा ऐसी कोई व्यवस्था नही की गयी है।

यहां बाज़ारों में जहां लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल होता है वहां खुले आम बीच मार्केट से वाहनों का आना जाना होता रहता है जिससे आम लोगों को भारी परेशानियां भी उठानी पड रही है। जबकि और दूसरे धर्म के त्योहारों में ये देखा जाता है कि मेन मार्केट में गुरुद्वारा तिराहे से घण्टाघर जाने वाले मार्ग पर चार पहिया और दूसरे भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी जाती थी। इसका सख्ती से पालन कराने के लिए बाकायदा पुलिस फ़ोर्स तैनात होती थी लेकिन मुसलमानों के सबसे बड़े इस त्यौहार पर पुलिस विभाग की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नही है। बराबर भीड़ में से होकर ही वाहन संचालन जारी है। जबकि दूसरी तरफ पीपल तिराहे पर बैठे ट्रैफिक होमगार्ड केवल वाहनों से उगाही करते दिखाई दे रहे हैं। यातायात नियंत्रित करने से उनका कोई लेना देना नही दिखाई देता है। इस समस्या से जनता त्राहि त्राहि कर रही है। नमाज़ अलविदा के समय में तकरीब सभी मस्जिदों के आस पास सुरक्षा के लिहाज़ से जरूर पुलिस फ़ोर्स लगाई गयी थी जो नमाज़ के बाद हटा दी गई।