बाबरी मस्जिद की शहादत को यौम-ए-स्याह के तौर पर मनाया गया

अब्दुल अज़ीज़
बहराइच, यूपी

अयोध्या की ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद की शहादत की 23 वीं बरसी को यौम-ए-स्याह यानी काला दिन के तौर पर मनाया गया। बहराइच ज़िले में कई मुस्लिम संगठनों ने यौम-ए-स्याह मनाते हुए धरना-प्रदर्शन और विरोध मार्च निकाला और अपना विरोध दर्ज कराते हुए ज़िला प्रशासन के जरिये केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया गया।

यूँ तो हिन्दोस्तानी मुसलमानों के लिए 6 दिसम्बर का दिन बहुत ही दर्दनाक और रन्ज-ओ-गम का दिन माना जाता है। इसी दिन 1992 को फैज़ाबाद के अयोध्या में बाबरी मस्जिद को मुल्क के अनासिरों के ज़रिये एक साजिश के तहत शहीद कर दिया गया था। इस दिन देश का मुसलमान अपनी लाचारी की वजह से सबकुछ देखते हुए भी बाबरी मस्जिद नही बचा पाया।

इस गैर संवैधानिक कार्य के खिलाफ बहराइच में एक लम्बे समय से 6 दिसम्बर को तमाम मुस्लिम संगठन अपने-अपने तरीके से धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराते हैं। इसके साथ ही सरकार को ज्ञापन देकर अपनी माँगों से वाबस्ता कराते हैं। इसी मरहले में आज कुल हिन्द इस्लामिक फेडरेशन के बैनर तले बाबरी मस्जिद की शहादत पर अपना विरोध दर्ज कराने के मकसद से मुकामी घण्टाघर से लेकर कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला गया। इस मार्च में शहर के हजारों लोगों ने भाग लिया। इसमें खासतौर से अयोध्या से आये महन्त युगुल किशोर शरण शास्त्री और लखनऊ से आये संदीप पाण्डेय भी मौजूद रहे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के जबर्दस्त इंतज़ाम किए गए थे। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग कलेक्ट्रेट पहुंच कर ज़िला प्रशासन ज़रिये राष्ट्रपति को ज्ञापन पेश किया। इस ज्ञापन के जरिये हुकूमत से माँग की गयी है कि बाबरी मस्जिद की शहादत के ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाही की जाय। जब तक बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में है, तब तक उस जगह पर किसी किस्म की इबादात या पूजा वगैरह की इजाज़त न दी जाये। विवादित जगह पर सभी लोगों के आने जाने पर पाबन्दी लगाई जाये।

ज्ञापन में ये भी मांग की गयी है कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी करने और बयान देने वाले मिथलेश तिवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाही की जाये। इसके अलावा ये भी माँग की गयी है कि मुस्लिम नौजवानों को महज़ इसलिये हैरान और परेशान करते हुए उनको गलत तरीके से आतंकी कह कर सज़ा दी जा रही है, उसे तुरंत बन्द किया जाये। केवल गुनहगारों पर ही कार्यवाही की जाये। यही नहीं मुल्क की जेलों में जो बेगुनाह मुस्लिम नौजवान कैद हैं उन्हें रिहा किया जाये। साथ ही इस बात को ध्यान में रखा जाये कि किसी बेगुनाह की गिरफ्तारी न होने पाये। ज्ञापन के जरिये सच्चर कमेटी की सिफारिशों को जल्द लागू कराते हुए उसके प्रचार प्रसार किया जाये।

इस प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा वसीमुल हक, मौलाना शाहिद अख्तर “चाँद”, मुस्लिम बेदारी फोरम के अध्यक्ष मो अकरम एडवोकेट, डा नईम, डा अजीमुल्ला खान, एमआई इस्लाम, सपा नेता नज़ीर अंसारी, निहाल भाई, जावेद जाफरी, जमाल अज़हर सिद्दीकी, नासिर अली उर्फ़ नईम खान समेत काफी तादाद में स्थानीय लोग शामिल हुए।

इस प्रदर्शन की कयादत फेडरेशन के ज़िलाध्यक्ष रियाजुद्दीन “राजू” ने की। ज्ञापन देने से पहले कलेक्ट्रेट के धरना स्थान पर मौजूद भीड़ को राष्ट्रीय अध्यक्ष डा वसीमुल हक, मौलाना चाँद, ज़िलाध्यक्ष रियाजुद्दीन, जमाल अज़हर सिद्दीकी, मो अकरम और अयोध्या व लखनऊ से आने मेहमानों के संबोधित किया।

दूसरी तरफ बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमेटी के अध्यक्ष शकील किदवई और सफात अहमद, मुस्लिम लीग के अध्यक्ष सुलेमान की कयादत में और दीगर मुस्लिम तन्जीमों ने भी बाबरी मस्जिद की शहादत पर यौम-ए-स्याह मनाते हुए ज़िला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।