PNS की ख़बर पर मुहर, फूलपुर से अबुल कैस बीएसपी के उम्मीदवार

मोहम्मद शारिक़ ख़ान

आज़मगढ़, यूपी

यूपी में राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण ज़िला आज़मगढ़ पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें हैं। यहां की फूलपुर सीट के लिए बीएसपी में कई दावेदार सामने आए हैं। सभी को उम्मीद थी कि इस सीट पर बीएसपी किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट मिलेगा। पीएनएस ने सबसे पहले ये कबर दी थी कि आज़मगढ़ की फूलपुर सीट से बीएसपी अबुल कैस आज़मी को अपना उम्मीदवार बनाएगी। आज पार्टी ने इसकी घोषणा कर दी।

बीएसपी के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर घनश्याम चंद्र ने आज आज़मगढ़ ज़िले की दो सीट पर उम्मीदवारों के नाम का एलान किया। इसमें फूलपुर सीट से अबुल कैस आज़मी और निजामाबाद से चंद्रदेव राम यादव के नाम की घोषणा हुई। अबुल कैस आज़मी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। पीएनएस को बीएसपी सूत्रों से खबर मिली थी कि उम्मीदवार के तौर पर अबुल कैस सबसे फिट हैं। आज पार्टी ने उनके नाम की घोषणा कर दी।

मालूम हो कि इसी सीट पर दुबई के मशहूर व्यवसायी और संजरपुर निवासी शाहिद संजरी भी दावेदार थे। वो लगातार बीएसपी के बड़े नेताओं के संपर्क में थे। इसके साथ ही बीएसपी के पूराने नेता अरशद ख़ान भी दावेदारों के लिस्ट में शामिल थे। वहीं लियाकत अली भी टिकट पाने के लिए पूरा ज़ोर लगाए हुए थे। ज़ोनल कोऑर्डिनेटर की तरफ से नाम की घोषणा होने के बाद सभी लोगों मायूष हो गए।

बात अगर 2012 के चुनाव की करें तो ये सीट सपा के उम्मीदवार ने जीती थी। वहीं बीएसपी के टिकट पर चुनाव में खड़े हुए अबुल कैस आज़मी दूसरे नंबर थे। उस समय में पार्टी में कई उम्मीदवार थे लेकिन पार्टी हाई कमान ने अबुल कैस आज़मी पर भरोसा जताया था। इस बार के चुनाव में भी उनका पलड़ा भारी दिखाई दे रहा था।

अबुल कैस आज़मी मूल रूप से खरेवां के रहने वाले हैं। इनका कारोबार सरायमीर और दुबई में हैं। अबुल कैस आज़मी ने अपनी राजनीतिक की पहली सीढ़ी बीएसपी से शुरु की। वो पिछले 10 सालों बीएसपी से जुड़े हुए हैं। अबुल कैस ने अपनी राजनीतिक पारी के दौरान कई उतार चढ़ाव देखे लेकिन वो पार्टी में लगे रहे। वे लगातार पार्टी की सेवा और पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करते रहे।

साल 2012 के विधान सभा चुनाव में पार्टी ने इनके पर विश्वास जताया और इमरान अहमद उर्फ़ हिटलर का टिकट काट कर इनको फूलपुर से उम्मीदवार बनाया। इसके आने के बाद पार्टी में कुछ आपसी खींचातानी और विरोध के चलते वह कम मार्जिन से चुनाव हार गए। 2014 के लोक सभा चुनाव बाद पार्टी ने अबुल कैस आज़मी के बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दौरान भी वह पार्टी से जुड़े रहे और कुछ ही महीनो बाद ये पुनः पार्टी में वापस आ गए।