दास्तान-ए-अमीर खुसरु की पेशकश पर फिदा हुए लोग

नई दिल्ली

अमीर खुसरु… उर्दू अदब एक सा नाम जो जो अपने अपने आप में पूरी दास्तान को समेटे हैं। बारहवीं सदी में जन्में अमीर खुसरु शायर, अदीब के साथ-साथ म्यूजीशियन भी थे। उनकी याद-ए-कारवां में हमेशा जश्न मनाया जाता है। इसी कड़ी में सबसे बड़ा सूफी फेस्टिवल जहान-ए-खुसरु दिल्ली में आयोजित हुआ। यहां साहिल की दास्तान ने अमीर खुसरु की याद ताज़ा कर दी।

अमीर खुसरु की दास्तान ने महफ़िल में जो समां बांधा कि मौजूद लोगों बस देखते रह गए। ये कार्यक्रम उर्दू अदब और फ़िल्मी दुनिया का बड़ा नाम मुज़फ्फर अली की कोशिशों से दिल्ली में मनाया। इस प्रोग्राम में दिल्ली ने मशहूर दास्तानगो साहिल आगा ने अमीर खुसरु पर दास्तान पेश की। दास्तान का अंदाज़ ऐसा था कि मानो लोगों को ये महसूस हो रहा हो कि अमीर खुसरु खुद उनके बीच मौजूद हो।

महफिल जारी थी लोग अपनी जगह से उठना नहीं चाहते थे। हर कोई ये चाहता था कि साहिल की दास्तान लगातार चलती रहे। हर कोई एक के बाद एक दास्तान की फरमाइश करने लगा तो साहिल भी दास्ताने सुनाते रहे। ये दास्ताने अमीर खुसरु पर थी। इस प्रोग्राम का आयोजन रूमी फाउंडेशन के बैनर तले हुआ। इसमें खासतोर पर लोक गायिका मालिनी अवस्थी, सूफी गायक हंसराज हंस, उस्ताद इक़बाल अहमद खान, दिलेर मेहँदी समेत कई फनकारों ने अपने फन का मुज़ाहिरा किया।