सत्येंद्र के लिए फरिश्ता बन गए पत्रकार मुन्ने भारती

नई दिल्ली

बात इसी साल 12 मई की है… दिल्ली यूपी बार्डर पर ओखला के करीब कालिंदी कुज के पास की घटना है।18 साल का एक लड़का बिजली के खंबे से सटकर खड़े ई-रिक्शा पर ज़ोर-ज़ोर से हिल रहा था। पास से ही गुज़र रहे एक शख्स की निगाह उस लड़के पर पड़ी तो वह दौड़ते हुए वहां पहुंचे और जैसे ही लड़के का हाथ पकड़ा तो एक तेज झटका उन्हें लगा। वह दूर जाकर गिर गए। अचानक उन्हें समझ में आ गया कि लड़के को बिजली का करंट लग रहा था।

उस शख्स ने आसपास के लोगों को आवाज़ लगाई और लड़के को बचाने में जी-जान से जुट गये। ये शख्स थे एम अतहरुद्दीन मुन्ने भारती। मुन्ने भारती पेशे से पत्रकार हैं और एनडीटीवी से जुड़े हैं। इस दौरान लड़के को काफी देर तक करंट लग चुका था। उसके मुंह से लगातार झाग निकल रहा है। लड़का बेहोशी की हालत में था और उसका बदन अकड़ रहा था। आँखें सुर्ख़ हो चुकी थी।

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मुन्ने भारती बिना वक्त गँवाये उसकी मदद में लग गए। इस दौरान काफी लोग इकठ्ठा हो गए पर मदद के नाम पर कोई आगे आने को तैयार नहीं था। इसी बीच एक दिव्यांग जिसका एक हाथ टूटा हुआ था मदद को आगे आया। उसके बाद कुछ लोग आगे बढ़े। मुन्ने भारती ने टेम्पों की मदद से उसे पास के ही अस्पताल ले गए जहां उसका इलाज शुरु किया गया।

इसके बाद मुन्ने भारती ने कई लोगों की मदद से उस लड़के की पहचान की। घायल लड़के का नाम सत्येंद्र यादव था। मुन्ने भारती ने फोन करके उसके पिता को हालात से वाकिफ कराया। मामला पता चलते ही सत्येंद्र का परिवार बदहवाशी की हालत में अस्पताल पहुंचा। इस दौरान डॉक्टरों ने सत्येंद्र का इलाज शुरु कर दिया था।

सत्येंद्र यादव का परिवार पास के ही दिल्ली के खादर विस्तार के गली नंबर 2 के बी-105 का रहने वाला है। वह अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए ई-रिक्शा चलाता था। फिलहाल सत्येद्र ठीक हो गया है लेकिन करंट लगने का निशान अब भी उसके शरीर पर है। वह मुन्ने भारती को फरिश्ता मानता है। सत्येंद्र का कहना है कि अगर वक्त से उसे मदद न मिलती तो शायद वो जिंदा न रहता। सत्येंद्र का परिवार मुन्ने भारती का एहसान मान रहा है। उसके पिता का कहना है कि आज के माहौल में जब हर तरफ कुछ लोग सांप्रदायिकता का ज़हर घोल रहे हैं तो ऐसे में मुन्ने भारती ने इन सबसे आगे बढ़कर इंसानियत और भाईचारा की मिशाल पेश की है। पीएनएस की टीम मुन्ने भारती के जज़्बे को सलाम करती है।