मुनव्वर राना: मोदी कहेंगे तो उनका जूता भी उठा लूंगा

दबाव में अवार्ड वापसी की पीएनएस की खबर सही साबित हुई

लखनऊ

देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और असहिष्णुता के माहौल को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने वाले मशहूर शायर मुनव्वर राना के सुर अब बदल गए हैं। शायर मुनव्वर राना ने कहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी उनके बड़े भाई की तरह हैं और अगर वह इस हैसियत से कहेंगे तो वह उनका जूता उठाने को भी तैयार हैं। दरअसल पीएमओ से एक फोन आने के बाद ये सारा मामले बदल गया हैं। शायर मुनव्वर राना के इस बयान के बाद साहित्य जगत में हंगामा मच गया है, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक मुहिम सी चल गई है।

मुनव्वर राना आज अपने घर पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी की बड़ी इज्जत करता हूं। अगर पीएम मोदी कहेंगे तो वह साहित्य अकादमी अवार्ड वापस ले लेंगे। मुनव्वर राना ने कहा कि मैं अगले हफ्ते पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।

मशहूर शायर मुनव्वर राना ने कहा कि सत्ता और इनाम का उन्हें न तो पहले शौक था और न ही अभी है। मुनव्वर ने राना इस बात को दोहराया कि सत्ता तो उनके शहर की नालियों में बहती है। उन्होंने कहा कि मैं तो उसूलों पर चलने वाला व्यक्ति हूं। मर जाऊंगा, लेकिन अपने उसूलों से समझौता नहीं करूंगा। देश में आपसी भाईचारे का माहौल भी बनाना है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के पास सच बताने वाला कोई शख्स होना चाहिए। सिर्फ खुशामद करने वाले व्यक्ति कभी-कभी घातक हो जाते हैं।

मालूम हो कि अभी 18 अक्टूबर को एक न्यूज़ चैनल के लाइव शो के दौरान शायर मुनव्वर राना ने साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने का एलान किया था। मुनव्वर राना की मुलाकात जल्द ही पीएस नरेंद्र मोदी से हो सकती है। दरअसल पीएमओ (पीएम आफिस) ने मुनव्वर राना से संपर्क कर यह पूछा है कि ‘आप मुलाकात के लिए कब उपलब्ध हो सकते हैं।’

शायर मुनव्वर राना यूपी के रायबरेली के रहने वाले हैं। मुनव्वर राना ने पीएमओ से बुलाने की खबर की तस्दीक की है। ऐसा माना जा रहा है कि अगले हफ्ते पीएम नरेंद्र मोदी की शायर मुनव्वर राना से मुलाकात हो सकती है।

पीएनएस खबर सही साबित हुई
पीएनएस खबर ने मुनव्वर राना के अवार्ड लौटाने दिन ही ये खबर दी थी कि मुनव्वर राना ने ये अवार्ड कुछ लोगों के दबाव में आकर वापस किया है। दरअसल शायर मुनव्वर राना पर लगातर दबाव बनाया जा रहा था कि वह अपना अवार्ड वापस कर दें। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार शायर मुनव्वर राना से साहित्य एकाडमी अवार्ड वापस करने की मांग की जा रही थी। अवार्ड वापसी की मांग को एक मुहिम की तरह चलाया गया। शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने बाकायदा मांग की थी कि मुनव्वर राना अपना अवार्ड वापस कर दें। सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ लोगों ने मुनव्वर राना पर सवाल भी उठाया था। यही नहीं कई लोगों ने शायर मुनव्वर राना के खिलाफ अनाप-शनाप भी लिखा। इसके बाद शायर मुनव्वर राना ने इसका जवाब दिया था कि क्या हमारी कलम इतनी बूढ़ी हो चुकी है कि अब हम एवार्ड वापस करें। उनके जवाब से लगा था कि अवार्ड वापसी के लिए चलाई जा रही मुहिम से वह काफी आहत थे।

साहित्यकारों की मुहिम को झटका
मुनव्वर राना के इस कदम से साहित्यकारों की मुहिम को झटका लग सकता है। बीजेपी और उसके समर्थक पहले ही ये आरोप लगा चुके हैं कि अवार्ड वापसी कांग्रेस की प्रायोजित चाल है। अब ऐसे में शायर मुनव्वर राना का पीएम की तारीफ करना और उनसे मिलने की बात से उन्हें इस बात को बल मिलेगा कि सरकार सही काम कर रही है।