बिहार में 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी एमआईएम, महागठबंधन को राहत

नई दिल्ली/किशनगंज

एमआईएम ने बिहार के सीमांचल इलाके में अब सिर्फ 6 विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। किशनगंज में एमआईएम के प्रवक्ता और तेलंगाना में विधायक अहमद बिलाल ने प्रेस कांफ्रेस में इसका एलान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष ने सेक्यूलर वोटों के बिखराव न हो इसलिए ये फैसला किया। अहमद बिलाल ने कहा कि पार्टी इन सीटों पर मज़बूती से चुनाव लड़ेगी। एमआईएम का ये फैसला महागठबंधन के लिए राहत की खबर देने वाला है।

एमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पहले बिहार के सीमांचल की 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया था। अब पार्टी ने सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ वोटों के बिखराव को रोकने के लिए ये फैसला किया है। एमआईएम ने कोचाधामन सीट से प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमाम, किशनगंज से तासिरुद्दीन, बैंसी से गुलाम सरवर, अमौर से नवाज़िश आलम, बलरामपुर से मोहम्मद आदिल और रानीगंज से अजीत पासवान को उम्मीदवार बनाया है।

विधान सभा क्षेत्र उम्मीदवार
कोचाधामन अख्तरुल ईमान
किशनगंज तासिरुद्दीन
बैंसी गुलाम सरवर
अमौर नवाज़िस इस्लाम
बलरामपुर मोहम्मद आदिल
रानीगंज अजीत पासवान

दूसरी तरफ एमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ 6 सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि उनके 6 सीटों पर चुनाव लड़ने पर इतना हंगामा मचाया जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी ने मोर्चा बनाकर सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिया है। वहीं बीएसपी ने 150 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सपा और बीएसपी से ये सवाल क्यों नहीं पूछा जाता कि वह बिहार में किस आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं, और उनका जनाधार क्या हैं।

एमआईएम के इस फैसले से महागठबंधन में शामिल जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने राहत की सांस ली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एमआईएम ने रणनीति के तहत 24 के बजाय सिर्फ 6 सीटों पर चुनाव लड़ने के फैसला किया है। इससे एक तरफ लोगों में ये संदेश जाएगा कि एमआईएम सेक्यूलर वोटों का बिखराव नहीं कर रही है तो दूसरी तरफ इन 6 सीटों पर पार्टी पूरा ध्यान देगी। जानकारों के मुताबिक एमआईएम महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी धमाकेदार इंट्री के लिए ये सारी रणनीति पर अमल कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी किसी जल्दबाज़ी में कोई फैसला लेने के पक्ष में नहीं हैं। वह पार्टी के विस्तार के लिए ज़्यादा समय देना चाहते हैं।