बुलंद हौसले और हिम्मत की मिसाल है मेरठ की शबाना

मेरठ, यूपी

‘कर बहियां बल आपनो छोड़ पराई आस’ इसी कहावत को सच कर दिखाया है मेरठ की रहने वाला शबाना ने। दरअसल शबाना दोनों पैरों से माज़ूर है, लेकिन उसने जो हौसला दिखाया है उसे जानकर कोई भी उसे सलाम करेगा और उसकी तारीफ किये बिना रह नहीं सकेगा।

पोलियो के कारण शबाना के पैरों ने साथ छोड़ दिया। पिता का साया बचपन में ही उठ गया, लेकिन मेरठ की इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। शबाना ने इस अभिशाप को वरदान में बदल दिया। मजबूत हौसलों के सहारे अपनी मंजिल पाई। न सिर्फ उसने खुद उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि आज वह नेत्रहीन और विकलांग बच्चों के लिए स्कूल भी खोल चुकी हैं। शबाना ने इस स्कूल का नाम दिया है ‘कोशिश’।

ग्यारह महीने की उम्र में ही पोलियो की शिकार हुई शबाना की जिंदगी का सफर बेहद मुश्किल हालात में गुजरा। शबाना चल नहीं सकती थीं, लेकिन उसके दिल में हौसलों की उड़ान जरूर थी। इसी हौसले की बदौलत उसने अपनी तालीम के सिलसिले को लगातार जारी रखा और वह आगे पढ़ती गई और आगे बढ़ती गई। फिलहाल वह पोस्ट ग्रेजुएट है। शिक्षित होने के बाद वह बेसहारों का सहारा बन गई। नेत्रहीन बच्चों के लिए कुछ कर गुजरने की ठानी और वह मजबूत इरादों के साथ इस स्कूूल में ज्ञान का उजाला फैला रही है।

निश्चित तौर पर शबाना समाज के लिए एक मिसाल हैं, ऐसी कोशिश को ‘पीएनएस खबर’ की टीम दिल से सलाम करती है।