आतंकवादी बनाए गए 6 बेकसूर मुसलमान कोर्ट से बरी

लखनऊ, यूपी 

जेल में सात साल से बंद 6 बेकसूर मुसलमानों को आज सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। पुलिस ने इन्हें हूजी के आतंकवादी होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। लखनऊ ज़िले की एससीएसटी स्पेशल कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि यूपी की एसटीएफ ऐसे साक्ष्य नहीं पेश कर पाई, जिससे सभी के ऊपर लगे आरोप साबित हो पाएं।

कोर्ट का फैसला आने के बाद इस मामले में आईजी एसटीएफ सुजीत पांडेय ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फैसले का अध्‍ययन करने के बाद वह कानूनी सलाह लेंगे। इसके बाद अगर ज़रुरत पड़ी तो अपर कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे।

मालूम हो कि यूपी की एसटीएफ ने साल 2007 में 6 बेकसूर मुसलमानों को गिरफ्तार किया था। इनमें इजलालुद्दीन, नूर इस्लाम, अली अकबर हुसैन, शेख मुख्तार हुसैन, अजीजउर्रहमान सरदार और बिजनौर के नौशाद शामिल थे। इन सभी को एसटीएफ ने रेजीडेंसी के पास से गिरफ्तार करने का दावा किया था। साथ ही इनके पास से एके-47 और आरडीएक्स जैसे विस्फोटक सामान बरामद करने का भी दावा किया गया था।

यूपी की लखनऊ जेल में आठ साल से बंद याकूब, जलालुद्दीन और नौशाद को जेल में लगी विशेष अदालत ने पहले ही बरी कर दिया था। 2007 में लखनऊ में अलग-अलग जगहों से इन तीनों की गिरफ्तारी की गई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, याकूब की गिरफ्तारी 21 जून 2007 को चारबाग स्टेशन के पास से की गई थी और उसके पास से दो पैकेट आरडीएक्स, तार लगी घड़ियां, डेटोनेटर, एक बड़ी टाइमर घड़ी, बैटरी बरामद करने का दावा पुलिस ने किया था।

इसके बाद याकूब के निशानदेही पर ही जलालुद्दीन और नौशाद की गिरफ्तारी 23 जून 2007 को की गई थी। याकूब के वकील ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले में आठ साल बाद इन तीनों को बा-इज्ज़त बरी कर दिया गया। अभियोजन पक्ष इन आठ सालों में कोई भी सबूत पेश नहीं कर सका था।

बा-इज़्ज़त बरी किए गए इन बेकसूर लोगों के परिवार वालों ने कहा कि उन्हें पता था कि पुलिस ने झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार किया है। उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा था कि वह हम लोगों के साथ इंसाफ करेगी। परिवार वालों ने बताया कि पिछले आठ साल से केस लड़ते-लड़ते हम टूट गए हैं। हमारा परिवार बिखर गया है। अल्लाह का शुक्र है कि अब इंसाफ मिला है। अब हम दोबारा घर को बनाने की कोशिश करेंगे।