आईटी सेक्टर की मदद से “ई-कामर्स” व्यापार में पाएं निश्चित सफलता

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लखनऊ, यूपी

आज के समय में इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन व्यवसाय करना तथा ख़रीदारी करना बहुत पसंद किया जा रहा है। अब हमे मोबाइल, फर्नीचर, कपडे एवं इलेक्ट्रानिक का सामान आदि खरीदने के लिए बाजार नहीं जाना पड़ता है, बल्कि घर बैठे इंटरनेट ऑनलाइन शॉपिंग के द्वारा एक क्लिक से आप घर पर ही सामान मंगवा सकते है। ऑनलाइन शॉपिंग का व्यवसाय आज के समय में बहुत लोकप्रिय बन चुका है। इंटरनेट के माध्यम से खरीदारी को ही ई-कॉमर्स कहते है। हज़ारों ई-कॉमर्स की वेबसाइट के द्वारा ऑनलाइन व्यवसाय किया जा रहा है। बहुत से लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते है लेकिन उन्हें ई-कॉमर्स क्या है, इसका क्या मतलब होता है यह कितने प्रकार का है इस सम्बन्ध में पूरी जानकारी नहीं होती है।

क्या है ई-कामर्स व्यापार
ई-कॉमर्स को इंटरनेट या इलेक्ट्रानिक कॉमर्स भी कहते है। राजधानी लखनऊ में वित्त मामलों के जानकार प्रो मनीष हिंदवी के मुताबिक इंटरनेट के माध्यम से अपने व्यवसाय को संचालित करने को ई-कॉमर्स कहा जाता है। सामान और सेवाएं खरीदने, बेचने तथा ग्राहकों के साथ व्यवसाय करना एवं भागीदारी देना भी शामिल है। साथ ही पैसो के स्थानांतरण तथा डाटा के साँझा करने की भी प्रक्रिया है। जिसमे इलेक्ट्रानिक रूप में दो या दो से अधिक सहयोगियों के बीच डाटा अथवा धन स्थानांतरित होता रहता है। दुनिया में ई-कॉमर्स का शुभारम्भ 1960 में हुआ था।

ई-कामर्स व्यापार का सर्वे
हाल ही में यूथ4वर्क डॉट कॉम द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, ई-कॉमर्स उद्योग में निरन्तर विस्तार हो रहा है। इस सर्वेक्षण की मानें, तो अगले 10 वर्षों में भारत दूसरा सबसे बड़ा ई-कॉमर्स देश बन जाएगा। इतना ही नहीं यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ई-कॉमर्स उद्योग जल्द ही 30 फीसदी की दर से आगे बढ़ सकता है। इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के कारण भारत में आईटी सेक्टर और ई-कॉमर्स इंडस्ट्री में दिन-प्रति दिन विकास हो रहा है। आईटी क्षेत्र के बढ़ते विकास के कारण शिक्षा क्षेत्र में इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान की भी मांग बढ़ने लगी है। इसी कारण भारत के इस क्षेत्र में होने वाले विकास दर में 35.6 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है। यूथ4वर्क के द्वारा आई एक रिपोर्ट के अनुसार, बंगलुरू (35 फीसदी) में आईटी उद्योग में नौकरी के अवसरों की सबसे अधिक उपलब्धता है। इसके बाद हैदराबाद (23 फीसदी), दिल्ली (22.5 फीसदी) और अहमदाबाद (19 फीसदी) में नौकरियां उपलब्ध हैं। वहीं, मुंबई (15 फीसदी) और चेन्नई (11 फीसदी) जैसे शहरों में कम से कम नौकरी के अवसर मौजूद हैं। अगर बात करें एमबीए और ई-कॉमर्स क्षेत्र की, तो यहां दिल्ली (37 फीसदी) सबसे ऊपर है, जबकि मुंबई (28 फीसदी), बंगलुरू (21 फीसदी), अहमदाबाद (17 फीसदी), चेन्नई (14 फीसदी) और हैदराबाद (12 फीसदी) सबसे कम है।

नौकरियों के अवसर बढ़े
आधुनिक विश्व अर्थव्यवस्था आईटी क्षेत्र में भारत आईटी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। लखनऊ में क्वाइटसॉफ्ट से जुड़े मोहम्मद असद बताते हैं कि जहां पहले नौकरियां केवल बंगलुरू या फिर हैदराबाद तक ही सीमित थीं। आज वहीं इस क्षेत्र का विकास हो रहा है और अब भारत का आईटी हब चेन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, लखनऊ आदि अन्य शहरों में भी फैल गया है। असद बताते हैं कि ई-कामर्स और आईटी सेक्टर का मिलन दुनिया की कई देशों की ईकॉनामी को बदल कर रख दिया है। इस आईटी सेक्टर में छात्रों के लिए कोर्सेज में कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस, ह्यूमैनिटीज, बिजनेस एंड मैनेजमेंट आदि प्रमुख हैं।

कोविड के बाद ई-कामर्स में तेज़ी आई
प्रो मनीष हिंदवी बताते है कि कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। उस दौरान भारतीय आईटी उद्योग ने सकारात्मक संकेत दिया। इस अभूतपूर्व त्रासदी से उबरने में आईटी सेक्टर ने काफी मदद की। दरअसल बड़े व्यवपार के साथ छोटी कंपनिया भी ई-कामर्स के क्षेत्र में उतरने लगी। आईटी सेक्टर ने कासट कटिंग की और छोटे व्यवपारियों की मदद के लिए आगे आया। क्वाइटसॉफ्ट से जुड़े मोहम्मद असद बताते है कि भारत दुनिया भर में सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एक आईटी हब के रूप में उभरा है और भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों ने वैश्विक आईटी क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल किया है। भारत आईटी उद्योग के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सोर्सिंग डेस्टिनेशन बन गया है। इससे ऑनलाइन रिटेलिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और ई-कॉमर्स सभी आईटी उद्योग के तेजी से विकास में योगदान दे रहे हैं। 2019-20 के लिए आईटी क्षेत्र में विकास दर लगभग दस प्रतिशत है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के 2025 तक एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में से एक के 2025 तक 400 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाओं (ईएमएस) उद्योग के 2025 तक  23.5 बिलियन डॉलर्स से 6.5 गुना बढ़कर 152 बिलियन डॉलर्स होने की उम्मीद है। स्वचालित मार्ग के तहत 100% FDI की अनुमति है। अगले पांच वर्षों में, घरेलू प्रौद्योगिकी सेवाओं में 2-4% की वृद्धि हो सकती है क्योंकि दुनिया भर के उद्योग कोरोना-प्रेरित व्यवधानों से तेजी से उबरने के लिए डिजिटलीकरण को तेजी से अपना रहे हैं।

ई-कामर्स का बड़ा बाज़ार
भारत में ई-कॉमर्स के विकास के लिए पर्याप्त माहौल मौजूद है। बैंकिंग में जनता की भागीदारी और पैकेज डिलिवरी के मामले में दुनिया में भारत की रैंकिंग भी काफ़ी ऊंची है। आईटी सेक्टर में अपनी कंपनी चला रहे अनुराग सक्सेना के मुताबिक दुनिया भर में जहां 23 प्रतिशत लोग ऑनलाइन ख़रीदारी करते हैं। वहीं भारत जैसे कम आमदनी वाले देशों में ऐसे ग्राहकों की हिस्सेदारी अभी पांच प्रतिशत है। वहीं चीन जैसे ऊपरी मध्यम आमदनी वाले देशों में ऑनलाइन ख़रीदारी करने वाले ग्राहकों की भागीदारी 16 फ़ीसद और विकसित देशों में ये 53 प्रतिशत है।

क्वाइटसॉफ्ट से जुड़े मोहम्मद असद के मुताबिक भारत में ख़ुदरा ई-कामर्स कामयाबी की दास्तान है। इस क्षेत्र के लेन देन की विकास दर देश की आर्थिक विकास दर से लगभग दो गुनी है। कुल ख़ुदरा ख़रीद में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ख़रीद या बिक्री में लगातार बेहतरी आ रही है. 2012 में इसका हिस्सा दो फ़ीसद था और 2020 में कुल ख़रीदारी में इलेक्ट्रॉनिक ख़रीद फ़रोख़्त की हिस्सेदारी 6 से 8 प्रतिशत हो गई और 2026 से 2030 के बीच इसके बढ़कर 20 फ़ीसद होने की उम्मीद लगाई जा रही है। इससे पता चलता है कि इस समय भारत में ई-कॉमर्स का भविष्य काफी बड़ा और व्यापक होने वाला है।

ई-कामर्स से लाभ
ई-कामर्स से जुड़े लोगों और कंपनियो के बातचीत के बाद एक बात तो बिल्कुल साफ है कि ये कारोबार बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दूसरी बात ये है कि इसमें अप छोटे कारोबारी भी मैदान में उतर रहे हैं और भारी मुनाफा कमा रहे हैं। ई-कामर्स से कई बड़े लाभ हैं…

  • ई -कॉमर्स ग्राहक का बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में सहायता करता है |
  • ई-कॉमर्स ने कागज पर काम कम कर दिया है |
  • ई-कॉमर्स ने लेंन-देंन तथा उत्पादों की लागत को कम कर दिया है जिससे कम संपन्न लोग भी इन उत्पादों को खरीद सकते है |
  • ई-कॉमर्स ने संगठन के ब्रांड प्रतिबिम्ब को बेहतर बना दिया है |
  • ई-कॉमर्स न्यूनतम पूंजी में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यवसाय को बढ़ाता है |
  • ऑनलाइन शॉपिंग परंपरागत खरीदारी की तुलना में बेहतर होती है तथा समय की भी बचत होती है |
  • ई-कॉमर्स ग्राहकों को अच्छे और सस्ते उत्पादों को देखने का अवसर प्रदान करता है |
  • ई-कॉमर्स  व्यापार की प्रक्रियाओं में वृद्धि, सरलता और कुशलता देता है |
  • ई-कॉमर्स  व्यवसाय को ग्लोबल बाजार तक पहुंचने में सक्षम बनाता है |
  • ई-कॉमर्स का उपयोग आप दिन के 24 घंटे किसी भी समय कर सकते है |

ई-कामर्स की विशेषताएं

  • ऑनलाइन खरीदारी में आपको उत्पाद के विषय में सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है तथा मोल-भाव भी नहीं होता जिससे आपसे अधिक पैसे सामान के लिए नहीं लिए जा सकते, जबकि परंपरागत ख़रीदारी में ये सुविधा नहीं होती है |
  • विक्रेता और ग्राहक के बीच में सीधा संपर्क होता है तथा बीच में कोई मध्यस्त नहीं होता है |
  • इलेक्ट्रानिक व्यवसाय करने के लिए विक्रेता को अपने उत्पादों को बेचने के लिए दुकान की आवश्यकता नहीं होती है |
  • किसी भी ग्राहक को खरीदारी करने के लिए किसी दुकान या स्थान पर नहीं जाना पड़ता है, ई-कॉमर्स की सहायता से किसी भी जगह से ऑनलाइन शॉपिंग कर सकता है |
  • ई-कॉमर्स के द्वारा खरीदारी में परिवहन खर्च में बचत तथा समय की भी बचत होती है, फ़ोन या लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन शॉपिंग कर के सामान का आर्डर कर देते है और सामान घर पर पंहुचा दिया जाता है |
  • इंटरनेट का  प्रयोग पूरे विश्व में हो रहा है, इसलिए इंटरनेट सेवाओं का लाभ कही पर भी लिया जा सकता है |

एक बात तो तय है कि आईटी सेक्टर में भारत अब दुनिया के चुनिंदा ऐसे देशों में शामिल हो गया है जो अलग-अलग देशों को इस सेक्टर में मद रहा है। दूसरी तरफ आईटी सेक्टर की वजह से भारत ई-कामर्स का भी हब बनता जा रहा है। दरअसल दूसरे देशों के मुकाबले भारत में ई-कामर्स से जुड़ी बेबसाईट या फिर दूसरी ज़रूरतें बहुत आसानी से और कम लागत में उपलब्ध हैं। ऐसे में अगर आप भी ई-कामर्स सेक्टर में उतरना चाहते हैं तो देरी न करें। फैरन किसी आईटी सेक्टर से जुड़े लोगों से संपर्क कर कामयाबी को बुलंदी को छूएं।

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