ग़ाज़ीपुर: अज़ीम समाजी शख्सियत डॉ सिद्दीक़ी का इंतकाल

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गाजीपुर, यूपी

होमियोपैथिक जगत के प्रसिद्ध चिकित्सक, शिक्षक, कुशल वक्ता एवं राजनीति की गहरी पैठ रखने वाले डॉ मोहम्मद शबीहुद्दीन सिद्दीकी का रविवार 13 फरवरी देहांत हो गया। डॉ सिद्दीकी का स्वास्थ्य पिछले कई दिनो से ठीक नहीं था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद ग़ाज़ीपुर ही क्या, प्रदेश और देश  में उनके पढ़ाए हुए होम्योपैथिक छात्रों, मरीज़ों, सगे-सम्बन्धियों, जानने वालों में दुःख व्यक्त किया।

स्थानीय एमएएच. इंटर कॉलेज में उनके जनाजे की नमाज पढ़ाई गई। इसके बाद उनको उनके आबाई कब्रिस्तान में नम आँखों से सुपुर्द-ए- ख़ाक किया गया।

डॉ. सिद्दीकी पेशे से चिकित्सक-शिक्षक होने के साथ-साथ इस्लामिक विद्वान भी थे। अपने सेवाकाल में रहते हुए एक बड़े अज़्म को दिल में संजोए, समाज के शोषित और दबे कुचले लोगों की हमेशा आवाज़ बने। वो एक ग़ैर- राजनीतिक संगठन बामसेफ (BAMCEF) से जुड़ गए। दरअसल बामसेफ को कांशीराम ने ही बनाया था।

परिवार अड़चनो और विरोद के बावजूद पत्नी रज़िया सुल्तान के अबाध सहयोग से सारी बाधाओं को पार करते हुए उन्होंने “मिशन” का बड़ा काम किया। उनके काम को देखते हुए न सिर्फ गाज़ीपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल और यूपी की राजनीति में उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा। दलित एवं अन्य समाज के हक़-हुकूक़, सम्मान के लिए वो हमेशा लड़ते रहे।

मुसलमानों की राजनीतिक चेतना की शून्यता को लेकर वो बहुत चिंतित रहते थे। वो हमेशा राजनीतिक भागीदारी के साथ आर्थिक, सामाजिक और शिक्षित समाज बनाना चाहते थे। डॉ सिद्दीकी के जाने से ज़िले से कई समाज सेवियों, राजनीतिक दलों के नेताओ एवं समाज के हर वर्ग और धर्म के लोगों ने उन्हें खिराजे अकीदत पेश की।