जब सीएम अखिलेश ने ‘आजतक’ के पत्रकार से कहा ‘तुम्हारी हैसियत क्या है’

अहमद अज़ीम आजतक में सीनियर पत्रकार हैं। उनके साथ 19 फरवरी को इटावा में ये घटना हुई। सीएम अखिलेश ने खुद ये बात कही। अहमद अज़ीम ने अपनी फेसबुक वाल पर ये बात लिखी है। उनकी फेसबुक वाल से बिना एडिट किए पीएनएस आपने सामने उनकी बात रख रहा है:-

जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुझसे कहा तुम पहले आदमी नहीं हो “आजतक” से और तुम्हारी हैसियत क्या है??

इटावा के सैफई में अभिनव स्कूल मतदान केंद्र पर यादव कुनबे ने विधान सभा चुनाव के तीसरे चरण में वोट डाला। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी धर्मेन्द्र यादव के साथ वोट डाल कर बाहर आये तो दो हिस्सों में जमा मीडियाकर्मियों में से एक गुट की तरफ चले गए जो गेट के बगल की दीवार के बाहर जमा था।

गेट के ठीक बाहर जहाँ हम लोगों को रुकने को कहा गया अखिलेश उधर नहीं आये और जब गाडी में बैठने के लिए बाहर आये तो मैंने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी धक्का-मुक्की करने लगे। ये पहला मौक़ा था जब मैं आमने-सामने अखिलेश से बात कर रहा था। मैंने कहा की यहाँ गेट के बाहर हमे इंतज़ार करने को कहा गया और आप दूसरी तरफ चले गए। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी बराबर धक्का-मुक्की करते रहे।

अखिलेश यादव ने मेरी बात सुन कर कहा “””अच्छा आगे आ जाओ”। हम सभी लोग उनकी गाडी के पीछे-पीछे चलने लगे। लेकिन सुरक्षाकर्मी फिर भी धक्का-मुक्की करते रहे। मतदान केंद्र से करीब 400 मीटर दूर अपने आवास के बाहर अखिलेश ने गाडी रुकवाई और आवास के गेट के बाहर ही बाइट देने के लिए तैयार हो गए। लेकिन बाइट के लिए माइक लगाने में भी उनके सुरक्षाकर्मी धक्का-मुक्की करते रहे। कई बार जब ऐसा हुआ तो मैंने थोडा तेज़ आवाज़ में साथ मौजूद दुसरे मीडिया कर्मियों से कहा..””छोड़ो हटाओ..इस तरह नहीं करेंगे बाइट..ये कोई तरीका नहीं है..हम लोग भाग-भाग कर आ रहे हैं और ये ऐसे बार-बार धक्का-मुक्की कर रहे हैं…

इस पर अखिलेश यादव ने जो जवाब दिया वो काफी हैरान करने वाला था। अखिलेश ने कहा;

“ऐ सुनो तुम पहले आदमी नहीं हो आजतक के

मैंने कहा- मुझे पता है सर

अखिलेश यादव ने तुरंत कहा-

“और तुम कोई हैसियत भी नहीं रखते हो।

क्यों लड़ रहे हो पुलिसवाले से। एक आदमी ले ले सबकी”
मैंने कहा मैं कोई लड़ाई नहीं कर रहा हूँ। आप खुद देखिये ये लोग क्या कर रहे हैं तब से…..

शायद तब तक अखिलेश को अंदाजा हो गया था की वो क्या कह गए और मुझसे कहा तुम पूछो सवाल…

मैंने जवाब दिया इतना दौडाने के बाद सांस ही नहीं रुक रही तो क्या पूछूं?? इस पर वो जोर से हंस दिये और इसके बाद सवाल-जवाब शुरू हो गया…….

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मजबूरी है की हमे बाइट चाहिए..इसलिए अखिलेश के इस रवैय्ये के बावजूद मुझे उनकी बाइट लेनी पड़ी। लेकिन बाद में मैंने सोचा की जिस तरह का रिस्पांस अखिलेश यादव का था क्या वो उनका नेचुरल व्यवहार था या परिवार के अन्दर से मिल रही चुनौतियों की वजह से वो अपना आपा खो गए!!
या इसके पीछे उनकी ये सोच थी की जब मीडिया संस्थानों के मालिकों और मुख्य संपादकों से मेरी सीधी बात हो रही है तो फिर रिपोर्टरनुमा सिपाही की क्या औकात!!

 

दूसरी तरफ जब मुलायम सिंह यादव वोट देकर बाहर निकले तो उनके भी सुरक्षाकर्मी मीडियाकर्मियों को पीछे धकेलने लगे। मुझे भी एक सुरक्षाकर्मी ने पीछे हटाया तो मुलायम ने तुरंत उस सुरक्षाकर्मी को ऐसा करने के लिए डांटा और फिर खुद अपने आगे लगे आजतक के माइक पर बोलना शुरू कर दिया।

तकरीबन एक जैसी परिस्थितियां लेकिन बेटे और बाप के व्यवहार में इतना फर्क।