आज़मगढ़ बवाल: तीसरे दिन जागी अखिलेश सरकार

आज़गमढ़ / लखनऊ, यूपी

मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र में हिंसा की वारदात अब थम गई है। चारो तरफ सन्नाटा पसरा है। खुदादादपुर गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात है। वहीं आसपास के गांवों में भी आरएएफ और पुलिस ने गस्त बढ़ाई है। इस बीच बीजेपी की सांसद नीलम सोनकर के क्षेत्र में दौरा करने से माहौल गर्म हुआ हुआ है। प्रशासन ने पहले किसी भी पार्टी के नेता को क्षेत्र में न जाने देने की बात कर रहा था। इस दौरे के बाद कई दलों ने बीजेपी और प्रशासन की आलोचना की है।

नेट सेवाएं बंद
अफवाह को देखते हुए दो दिन के लिए नेट सेवाएं बंद हैं। यूपी में ऐसा पहली बार हुआ है जब दंगा को देखते हुए नेट सेवाएं बंद की गई हैं। की लोगों ने इसे आपालकाल से तुलना की है। लोगों का मानना है कि जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए

वारदात के दूसरे दिन
बात दूसरे दिन की करें तो गुटों में झड़प, लाठीचार्ज, फायरिंग के बाद भी माहौल शांत नहीं हुआ था। पूर्व सांसद रमाकांत यादव के दौरे के बाद एक समुदाय विशेष के लोगों ने मुस्लिम बाहुल्य गांव को चारों तरफ से घेर लिया था। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को काफी मेहनत करनी पड़ी। दूसरी तरफ अगर अधिकारिक बयान को देखा जाए तो कल से ही मामला बिल्कुल शांत हैं।

इतवार को दिन भर पूरे इलाके में शान्ति रही लेकिन शाम होते-होते हिंसा अचानक फिर भड़क गई। इसमें फरिदाबाद बाजार के पास एक लकड़ी टाल में उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। जिससे पूरा गोदाम धू-धू कर जलने लगा वहीं, बाइक और टैक्टर को भी आग के हवाले कर दिया। जगह-जगह हिंसक झड़पों में दो लोग घायल हो गये। अफवाह के चलते पूरे ज़िले में माहौल काफी तनावपूर्ण है।

कब शुरु हुआ मामला
इससे पहले मामूली विवाद को लेकर खुदादादपुर में शनिवार की रात साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान सीओ, एसडीएम, तहसीलदार सहित दर्जन भर पुलिसकर्मी घायल हुए थे। वहीं आम लोगों को भी चोटें आयीं थी। दूसरी तरफ उपद्रवियों ने कई घरों में आगजनी के साथ ही लूट-पाट की घटना को भी अंजाम दिया था। दंगे को नियंत्रण करने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस छोड़ा गया। लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग के बाद किसी तरह हालात काबू में आया।

दूसरे इलाके में तनाव
पास के फरिदाबाद में उपद्रवियों ने एक युवक को गोली मारकर घायल कर दिया। इसके बाद फरिहां से लेकर फरिदाबाद तक हिंसा एक बार फिर फैल गई। जगह-जगह लोगों ने रोड जाम कर पथराव किया। सड़कों पर भारी संख्या में पत्थर बिखरे हुए थे जिसे देर रात नगर पालिका के कर्मचारियों ने साफ किया। इस दौरान पिछले 24 घंटे से आजमगढ-लखनऊ वाया सुल्तानपुर राज्यमार्ग को पुलिस ने बन्द करा दिया है।

प्रशासन स्थिति सामान्य होने का दावा करता रहा।
ज़िला प्रशासन पिछले दो दिनों से स्थिति सामान्य होने का दावा करता रहा। सवाल ये उठता है कि अगर माहौल शांत है तो फिर राज्य सरकार ने आज लखनऊ से एडीजी लॉ एंड आर्डर दलजीत चौधरी और एटीएस के आई असीम अरुण को क्यों मौके पर भेजा। दोनों अधिकारी मौके पर कैंम्प कर रहे हैं। पुलिस, पीएसी के साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती भी की गई है। पूरे इलाके में अघोषित कर्फ्यू लगा दिया गया है। जौनपुर-आज़मगढ़ रोज को बंद कर दिया गया है और आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है।

दंगाइयों पर मुकदमा
खबर लिखे जाने तक इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 21 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है जबकि 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी ज़िला प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं स्थानीय मुसलमानों ने शिकायत की है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है, वहीं मुकदमें और गिरफ्तारी भी मुसलमानों की हो रही है।

मुलायम सांसद, सपा के 9 विधायक
आज़मगढ़ ज़िले के मौजूदा सांसद सपा मुखिया मुलाय सिंह यादव हैं। वहीं ज़िले में विधान सभा की 10 सीटें हैं। इनमें 10 सीटों में 9 विधायक समाजवादी पार्टी के हैं। साथ ही 4 विधायक मुस्लिम हैं। लोगों का गुस्सा इसी बात पर है कि अब तक सरकार की तरफ से कोई हाल लेने नहीं आया। लोगों का यहां तक कहना है कि जब मुलायम के संसदीय क्षेत्र में मुसलमानों का ये हाल है तो बाकी यूपी के हाल का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

राजनीतिक दल
राजनीतिक दलों के बयान लगातार आ रहे हैं। कई लोगों ने शांति की अपील की है। वहीं प्रशासन और सपा सरकार की आलोचना की की गई है। बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी, एमआईएम और उलेमा कौंसिल ने सपा सरकार की आलोचना की है और दंगाइयों पर कार्रवाई की मांग की है।