आज़म ख़ान ने नौकरशाहों को अंधा, गुंगा और बहरा बताया

लखनऊ, यूपी

प्रदेश के काबीना मंत्री आज़म खान एक बार फिर विवादों में हैं। आज़म खान ने अपनी सरकार के प्रमुख सचिव न्याय पर जमकर भड़ास निकाली है। आज़म खान की तरफ से जारी खत में प्रमुख सचिव न्याय के खिलाफ जमकर हमला बोला है। आज़म खान ने कहा कि राज्य सरकार के नौकरशाहों का अंधा, गूंगा और बहरा हो जाना मेरे खिलाफ षडयंत्र नहीं तो और क्या है। दरअसल बुलंदशहर मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लताड़ लगने के बाद आज़म खान ने ये गुस्सा निकाला है।

दरअसल 29 सितंबर देर शाम आजम खान के पास राज्य सरकार के गोपनीय अनुभाग 1 से एक पत्र पहुंचा जिसे देखकर आज़म ख़ान भड़क गए। आज़म ख़ान के मुताबिक इस पत्र में लिखे दो शब्द ‘प्रभावी पैरवी’ देखकर उन्हें बहुत हैरत भी हुई और अफसोस भी। मंत्री आज़म खान ने तल्ख लहजे में सवाल उठाया कि जब 27 सितंबर को कोर्ट में पैरवी की ज़रूरत थी तब जानबूझकर मुझे सुप्रीम कोर्ट में शर्मिंदा कर दिया गया। इसके बाद इस ‘प्रभावी पैरवी’ का क्या मतलब है।

मालूम हो कि बुलंदशहर गैंगरेप के बाद आज़म ख़ान ने इसे कथित रूप से राजनीतिक षड़यंत्र बताया था। ‌इस घटना के बाद ‌पीड़ित परिवार की अपील पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज़म खां को कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से काबीना मंत्री आज़म खान को नोटिस तामील कराने का आदेश दिया था। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आज़म खान मंत्री हैं और वह राज्य सरकार का हिस्सा हैं इसलिए उन्हें नोटिस तामील कराने के‌ लिए राज्य सरकार को कहा जाए। दूसरी तरफ यूपी सरकार की ओर से आज़म खान को नोटिस तामील नहीं किया गया। बल्कि उन्हें बतौर प्राइवेट पार्टी नोटिस जारी किया गया।

आज़म खान इसी बात से नाराज़ थे। उन्होंने कहा कि इस केस की पैरवी कायदे से हो जानी चाहिए थी। पत्र में आज़म खान ने लिखा है कि जब आप ये साबित कर चुके हैं क‌ि उत्तर प्रदेश का न्याय विभाग मुझे सरकार का हिस्सा ही नहीं मानता तो फिर इस प्रभावी पैरवी का क्या मतलब है।