अलीगढ़ यूनिवर्सिटी का किशनगंज सेंटर बना चुनावी मुद्दा

PNS EXCLUSIVE

किशनगंज, बिहार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के किशनगंज सेंटर चुनावी मुद्दा बन गया है। यहां कांग्रेस के सांसद ने मौजूदा एनडीए की मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वो कैम्पस के लिए पैसे नहीं दे रही है। दूसरी तरफ एमआईएम ने अब तक कोई निर्माण न होने और यहां उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी पर सभी दलों को कटघरे में खड़ा किया है। एनडीए के घटक दल खामोश हैं।

मालूम हो कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के किशनगंज सेंटर की मांग बहुत पहले से की जारही थी। तत्कालीन यूपीए की सरकार ने इस पर फैसला लेते हुए बड़े तामझाम के साथ एएमयू के किशनगंज सेंटर की शुरूआत की थी। इस कैम्पस का उद्घाटन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 30 जनवरी 2014 को रुईधाशा मैदान में लाखों लोगों की मौजूदगी में किया था। उस समय मनमोहन सिंह की सरकार ने इसके लिए पहली किस्त के रूप में 137 करोड़ देने की घोषणा की थी।

एएमयू सेंटर में निर्माण के नाम पर आज भी कुछ नहीं हुआ है। इस मासले पर सवाल उठने के बाद यहां से मौजूदा कांग्रेस के सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने एक प्रेस रिलीज जारी की जिसमें ये इलज़ाम लगाया गया कि मौजूदा मोदी की सरकार एएमयू सेंटर के लिए मंज़ूरशुदा धनराशि जारी नहीं कर रही है। सांसद मौलाना कासमी ने कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और यूपीए सरकार का बचाव करते हुए कहा कि एएमयू सेंटर की निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में 137 करोड़ रुपये देने की घोषणा यूपीए सरकार ने की थी। उस समय वित्त मंत्रालय से इस धनराशि की मंजूरी दे दी थी।

मौलाना कासमी ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए की सरकार के 17 महीने बीत गए हैं। एएमयू सेंटर के लिए केंद्र ने कोई अतिरिक्त पैसा देना तो दूर स्वीकृति धनराशि का एक भी रुपया जारी नहीं किया है। सांसद कासमी ने कहा कि उन्होंने 16 मार्च 2015 को और कई दूसरे मौके पर लोक सभा में ये बात पुरज़ोर तरीके से उठाई है। मौलाना कासमी ने कहा कि मैंने इस सेंटर के लिए मंज़ूर किए गए 137 करोड़ रुपये को शीघ्र जारी कराने के लिए दौड़भाग में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन मौजूदा सरकार ने धनराशि नहीं दी।

बिहार में पहली बार चुनाव मैदान में उतरी एमआईएम ने भी इस मसले को ज़ोरदार तरीके से उठाया है। पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी रैलियों में कई बार इस बात का ज़िक्र किया है कि सीमांचल में उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के साथ लालू प्रसाद और नीतीश कुमार को भी दोषी ठहराया है। वहीं एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान तो अपनी जनसभाओं में एएमयू के किशनगंज सेंटर के न बनने के लिए महागठबंधन को दोषी बता चुके हैं। अख्तरुल ईमान इस इलाके के मौजूदा जनप्रतिनिधियों से सवाल कर रहे है कि उन्होंने इस मसले पर अब तक क्यों नहीं आवाज़ उठाई। एनडीए खामोश हैं, और उसके उम्मीदवार इस मामले पर कुठ भी बोलने से कतरा रहैं है।

बिहार विधान सभा चुनाव के बीच शुरू हुई ये बहस भले ही राजनीतिक दलों ने अपने फायदे के लिए शूरू किया हो लेकिन एक बात तो तय है कि किशनगंज का एएमयू सेंटर अब यहां के मुख्य चुनावी मुद्दे में शामिल हो गया है। यहां के लोगों का कहना है कि शायद अब इसी बहाने केंद्र और राज्य सरकार सीमांचल में उच्च सिक्षा संस्थानों की कमी को दूर करने के लिए कोई ठोस रणनीति पर काम करें, जिससे यहां के लोगों को फायदा मिल सके।