आखिर क्यों हटाए गए इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर

लखनऊ, यूपी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर एस डब्ल्यू अख्तर को हटाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि सक्षम प्राधिकारी वाइस चांसलर को तत्काल हटाने की कार्यवाही करें। यह आदेश जस्टिस एस एन शुक्ला और जस्टिस एक के सिंह प्रथम ने जुनैद अहमद की याचिका पर पारित किया।

जुनेद अहमद की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया था कि वाइस चांसलर सैय्यद वसीम अख्तर नियुक्ति इंटीग्रल यूनिवर्सिटी एक्ट की धारा 10 और अन्य नियमों व परिनियमों के विपरीत है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की और आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब देखना ये है कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में अब कौन वीसी बनता है।

लखनऊ हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सैय्यद वसीम अख्तर की नियुक्ति 21 मार्च 2005 को पांच साल के लिए हुई थी। पांच साल पूरा होने से पहले ही वीसी अख्तर का कार्यकाल 18 अगस्त 2008 को फिर से पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बाद नियमों के विपरीत 17 अगस्त 2013 को 18 अगस्त 2018 तक के लिए एक बार फिर पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि सारे नियमों पर विचार के बाद पाया गया कि एस वसीम अख्तर अपनी पहली नियुक्ति से पांच साल पूरे कर चुके हैं। वहीं वे 65 साल के भी हो चुके है लिहाजा उनकी नियुक्ति व कार्यकाल बढ़ाने संबधी आदेश नियम विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सैयद वसीम अख्तर को तत्काल हटाया जाता है।