मदरसा आधुनिकीकरण योजना का में उड़ाया जा रहा मज़ाक

BAHRAICH MADARSA SCAM 1 220116

खुलेआम हो रही है सरकारी धन की लूट-खसोट

अब्दुल अज़ीज़

बहराइच, यूपी
अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर और उनके शैक्षणिक विकास हेतु चलाई जा रही मदरसा आधुनिकीकरण जनपद में तमाशा बन कर रह गयी है। ये योजना केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही है। सरकार की तरफ से मदरसों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को हथियाने के लिए मदरसा संचालक नियम और दस्तूरों को धता बताते हुए शासकीय धन की बंदरबाँट कर रहे हैं। ये लोग राज्य में मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के भाग्य से खिलवाड़ करते नज़र आ रहे हैं।

दरअसल एक मामला जनपद के विकास क्षेत्र चितौरा अन्तर्गत ग्राम बनवारी गोपाल पुर में मौजबद मदरसा गौसिया मसूदुल उलूम में देखने को मिला है। ये मदरसा में बीते एक हफ्ते से बिना किसी अनुमति और पूर्व सूचना के बन्द कर दिया गया है। यहां तालीम हासिल कर रहे तकरीबन एक सौ बच्चों का भाग्य अधर में फंसता नजर आ रहा है।

इस सिलसिले में इलाके के ग्रामीणों ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को एक शिकायती पत्र भेजा है। इस प्रेषित शिकायती पत्र के ज़रिये अवगत कराया है कि उनके बच्चे इस मदरसे में पढ़ रहे हैं, लेकिन एक हफ्ते से मदरसे पर ताला लटका हुआ है। इस मदरसे में पढ़ाने वाली दो महिला टीचर रोज़ आती हैं और ताला बन्द देख कर लौट जाती हैं। जब मदरसा बन्दी के बारे में वहाँ के इंचार्ज और प्रधानाध्यापक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मदरसे की उक्त तीनों टीचरों को मदरसा संचालक द्वारा बर्खाश्त कर दिया गया है। जब उनकी जगह पर दूसरे टीचरों की नियुक्ति हो जायेगी तभी मदरसा खोला जायेगा।

उल्लेखनीय है कि मदरसा संचालक द्वारा तीन टीचरों की अवैध तरीकों से नियुक्ति की गई थी। इसके बाद बीते दस सालों से मदरसे का संचालन करते हुए सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान व अन्य आर्थिक सहायता अर्जित की जाती रही है। पिछले कई महीनों से मदरसे के प्रधानाध्यापक द्वारा बदनीयती से इन महिला टीचरों के साथ किये जा रहे व्यवहार ने टूल पकड़ लिया। अब मामला बढ़ता देखकर प्रधानाध्यापक ने साजिश रचते हुए फर्जी तरीके से पहले तो विभिन्न प्रकार की नोटिसों के जरिये उन्हें परेशान किया। आखिर में जब उनकी बात नही बनी तो गलत तरीके से उनको बर्खास्त कर दिया।

ये मदरसा सरकार और मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है और यहाँ इस तरह की किसी भी कार्यवाही के लिए ज़िला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से अनुमोदन लेना आवश्यक है। परन्तु प्रधानाध्यापक ने ऐसा कुछ भी नही किया गया और मनमाने तरीके से अपनी राजनैतिक लड़ाई में इन मासूमों के भाग्य को दांव पर लगा दिया गया है। प्रधानाध्यापक की इस गैरकानूनी कार्रवाई से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। दूसरी तरफ पहले यहां काम कर ही दोनों टीचर अलग परेशान हैं। सूत्रों को ये भी कहना है कि तीसरा टीचर और कोई नही है बल्कि प्रधानाध्यापक अपने ही एक बेटे को अध्यापक दिखा कर अभी तक उसका भी वेतन आहरित करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।