मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी खतरे में, हाई कोर्ट सख्त

लखनऊ

अदालतों के फैसलों से परेशान चल रही राज्य सरकार के लिए एक बुरी खबर आई। इस बार मामला मुख्य सूचना आयुक्त की तैनाती के संबंध में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी की अखिलेश सरकार से सवाल किया है कि राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर जावेद उस्मानी के चयन कैसे किया। हाई कोर्ट ने पूछा है कि इसके लिए राज्य सरकार ने सभी नामों में से तुलनात्मक श्रेष्ठता का आंकलन कैसे किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसके बाद एक हफ्ते में याचिकाकर्ता इसका प्रतिउत्तर पेश कर सकेगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी।

जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस महेंद्र दयाल की लखनऊ खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय वकील मनेंद्रनाथ राय की दो लंबित याचिकाओं पर दिया। इनमें मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी समेत आठ दूसरे सूचना आयुक्तों के चयन और तैनाती प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। इस याचिका में इन सभी की तैनाती रद्द किए जाने की मांग की गई है। बुधवार को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से चयन संबंधी रिकॉर्ड तलब किया था, जो गुरुवार को पेश किया गया।

इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने हाई कोर्ट को बताया कि सीआईसी के लिए कुल 31 आवेदन मिले थे। इनमें से चार में तकनीकी खामियां थीं। चयन समिति ने बाकी बचे 27 आवेदनों पर गौर कर पूर्व मुख्य सचिव जावेद उस्मानी का इस पद के लिए चयन किया।

हाई कोर्ट ने पूछा कि चयन समिति ने आवेदनों में तुलनात्मक श्रेष्ठता कैसे परखी। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पूछा कि सीआईसी पद के लिए उस्मानी के चयन में तुलनात्मक श्रेष्ठता का आकलन करने के लिए क्या कवायद की गई।