बटला हाउस एनकाउंटर दिल्ली पुलिस की साजिश: मौलाना रशादी

जांच की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जबरदस्त प्रदर्शन

दिल्ली

राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने दिल्ली पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। मौलाना रशादी ने कहा है कि साल 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाकों के 6 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने मुस्लिम नौजवानों को फंसाने की नीयत से साजिश रचकर 19 सितंबर, 2008 को दिल्ली के जामिया नगर के बटला हाउस में फर्ज़ी मुठभेड़ को अंजाम दिया था। इस दौरान दो बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को मौत के घात उतार दिया गया था। इसके साथ ही कई मुस्लिम नौजवानों को इस केस फंसाकर उनकी ज़िदगीयां बर्बाद कर दी गई। मौलाना रशादी दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित पार्टी के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।

आज यानी 19 सितंबर को बटला हाउस फर्ज़ी एनकाउंटर की सातवीं बरसी के मौके पर राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के तत्वाधान में यूपी इत्तेहाद फ्रंट की तरफ से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में भाग लेने के लिए खास तौर पर आज़मगढ़ से दिल्ली के लिए कैफियात एक्सप्रेस भरकर प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचे थे। इस प्रदर्शन का मकसद बटला हाउस फर्ज़ी एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग करना था।

धरना स्थल पर मौजूद भीड़
धरना स्थल पर मौजूद भीड़

धरने-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उलेमा कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि बटला हाउस फर्ज़ी एनकाउंटर का विरोध उस समय आज़मगढ़ से लेकर दिल्ली तक किया गया था। यही नहीं इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया था। उस समय ये मांग की गई थी कि इसकी न्यायिक जांच कराई जाए ताकि लोगों को इसकी सच्चाई का पता चल सके। तत्कालीन यूपीए की केंद्र सरकार ने इस फर्ज़ी एनकाउंटर की न्यायिक जांच न कराकर लोकतंत्र का घला घोट दिया। लगातार मांग करने के बावजूद सरकार ने न तो अपने कर्तव्यों का पालन किया और न ही न्याय व्यवस्था का पालन नहीं किया। मौलाना रशादी ने कहा कि कानून के मुताबिक किसी भी तरह की पुलिस मूठभेड़ की जांच मजिस्ट्रेट से कराना ज़रूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये कहा कि किसी भी एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट से जांच ज़रूरी है। मौलाना रशादी ने कहा कि जब गुजरात में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर, इशरत जहां एनकाउंटर, देहरादून छात्र रणवीर एनकाउंटर और पटना के छात्रों के एनकाउंटर की जांच हो सकती है, तो बटला हाउस फर्ज़ी एनकाउंटर की जांच क्यों नहीं कराई जा सकती। मौलाना रशादी ने कहा कि दरअसल ये एक साजिश थी जिसमें एक काबिल पुलिस अफसर और दो बेकसूर मुस्लिम नौजवानों की हत्या कर दी गई।

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’… की बात करते हैं, पर क्या सबको न्याय मिले बिना ‘सबका साथ, सबका विकास’ हो सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार न्याय देने के बजाय समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद बलास्ट, मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियो को बचाने में लगी है। बीजेपी सरकार भी यूपीए सरकार की तरह हर आतंकी वारदात में मुसलमानों का नाम जोड़ने की कोशिश में लगी हुई है। मौलाना रशादी ने कहा कि मध्य प्रदेश के झाबुआ में ब्लास्ट में बीजेपी और आरएसएस का कनेक्शन खुलकर सामने आया है, पर इस केस में भी सिमी का नाम जोड़ने की कवायद चल रही है। मौलाना रशादी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर केजरीवाल सच में इंसाफ पसंद है, तो वह बटला हाउस फर्ज़ी एनकाउंटर की जांच कराएं। मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि इंसाफ मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

धरने के संबोधित करते हुए परचम पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सलीम पीरज़ादा
धरने के संबोधित करते हुए परचम पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सलीम पीरज़ादा

परचम पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ई. सलीम पीरज़ादा ने कहा कि मुल्क में किसी भी इंसान पर देशद्रोह का मुकदमा कर दिया जाता है। बाद में कई साल लड़ाई लड़ने के बाद वह बेकसूर बरी हो जाता है, पर उसकी आधी ज़िंदगी जेल की सलाखों में कट जाती है। बाकी ज़िंदगी वह मुआवज़े के लिए लड़ता रहता है। सलीम पीरज़ादा ने कहा कि पुलिस, इंटेलीजेंस एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और बेकसूर लोगों को फंसाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

धरने को संबोधित करते हुए वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ सैयद कासिम रसूल ने कहा कि मुसलमानों के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग और वंचित समाज भी भेदभाव का शिकार है। उन्होंने कहा कि कई नौजवान दस बारह साल तक जेल में रहने के बाद बेगुनाह होकर छूट जाते हैं पर उनकी साथ हुई नाइंसाफी का ज़िम्मेदार कौन है। सरकार को ये ज़िम्मेदारी तय करनी होगी।

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इंडियन नेशनल लीग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सुलेमान ने भी धरने को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारे सामने कई ऐसे केस है, जिसमें बेकसूर नौजवानों को निचली अदालतों ने दबाव में सज़ा दे दी। बाद में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बा-इज़्ज़त बरी कर दिया। ऐसे में निचली अदालतों की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगता है। राष्ट्रीय उलोमा कौंसिल के महासचिव मौलाना ताहिर मदनी ने कहा कि आज़ादी के बाद से ही मुसलामानों का लगातार शोषण हुआ है। मुल्क के बंटवारे का इल्ज़ाम हम पर लगाया गया। फिर दंगों में हमें जानी-माली नुकसान पहुंचाया गया। अब आतंकवाद के नाम पर नौजवानों को फंसाकर उनकी ज़िंदगी को बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुल्क की सेक्यूलर पार्टियां हमारा इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के लिए कर रही है।

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धरने को उलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष परमात्मा शरण पाण्डेय, मौलाना निज़ामुद्दीन इस्लाही, मौ शहाब अख्तर, राष्ट्रीय सचिव गुलाम मौहम्मद रजवी, मुफ्ती गुफरान कासमी, मुक्तदा हुसैन ने भी संबोधित किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ निज़ामुद्दीन खान, प्रदेश महासचिव डॉ ज़फर आलम, नुरुलहोदा अंसारी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सैयद मोहम्मद नुरुल्लाह, महाराष्ट्र अध्यक्ष नूरुद्दीन आफताब, हरियाणा प्रदेश प्रभारी साहिब सिंह, तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष नूरुद्दीन अतीक, बिहार प्रदेश अध्यक्ष तारिक अनवर, मध्य प्रदेश प्रवक्ता डॉ अनवर अली समेत इत्तेहाद फ्रंट के कई नेताओं ने भी संबोधित किया।