गणपति मूर्ति के लिए आरिफ पठान की मुफ्त ऑटो सेवा

सांप्रदायिक एकता की मिशाल बने कोल्हापुर के आरिफ पठान

स्पेशल रिपोर्ट- इकबाल अहमद

कोल्हापुर, महाराष्ट्र

देश में एक तरफ कुछ असामाजिक लोग धर्म के नाम पर बांटने और लोगों के बीच दूरियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कोल्हापुर के एक मुस्लिम नौजवान ने इन्हीं दूरियों को मिटाने का बेड़ा उठाया है। महाराष्ट्र के रहने वाले आरिफ पठान हर साल गणपति उत्सव के दौरान अपने ऑटों पर गणपति की मूर्ति ले जाने वाले लोगों से किराया नहीं लेतें हैं। उनकी यही खासियत उन्हें दूसरों से जुदा करती है। आरिफ के इस काम की सभी तहेदिल से प्रशंसा कर रहे हैं।

आरिफ पठान ने पीएनएस न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बताया कि करीब 4 साल पहले की बात है। एक गरीब अपंग बूढ़े दंपति को गणपति उत्सव के दौरान मूर्ति के साथ उनके घर छोड़ने गए थे। जब वो पैसा देने लगे तो गरीबी देखकर मेरे मन को अजीब सा लगा। दिल में ख्याल आया कि इनसे पैसे नहीं लेना चाहिए। उन्होंने मुझे ऑटों का किराया दिया तो पैसे लेकर भी मैंने उन्हें वापस कर दिया। आरिफ पठान कहते हैं कि तब से हर गणपति उत्सव के दौरान मूर्ति ले जाने वाले लोगों से वह ऑटो का किराया नहीं लेते।

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महाराष्ट्र के कोल्हापुर के रहने वाले आरिफ रशीद पठान पेशे से ड्राइवर हैं। वह शहर में दूसरे ऑटो ड्राइवर की तरह ही अपना ऑटो चलाते हैं। आरिफ पठान ने 12वीं तक की पढ़ाई की है। अब वह 38 साल के हैं। आरिफ पिछले 10 साल से इसी शहर में ऑटों चला रहे हैं। आरिफ पठान के परिवार में उनके मां-बाप, पत्नी और एक बेटी है। आरिफ पठान को बेटी से बेहद प्यार है, पूछने पर चेहरे पर हंसी आती है। वह कहते हैं बेटी ही उनकी ज़िंदगी है। आरिफ ऑटों चलाकर रोज़ाना 400 से 500 रूपये तक कमा लेतें हैं। इस कमाई में पेट्रोल का खर्च भी निकल जाता है। वह परिवार में अकेले कमाने वाले व्यक्ति हैं। ज़ोर देकर पूछने पर कहते हैं कि गुज़ारा थोड़ा मुश्किल तो है पर घर का खर्च चल जाता है।

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आरिफ पठान ने अपने ऑटों पर एक पोस्टर लगा रखा हैं, जिसमें उन्होंने अपना मोबाइल नंबर दिया हैं। जैसे ही कोई आरिफ पठान को फोन करता है, वह तुरंत उसकी बताई हुई जगह पर पहुंच जाते हैं, और उसे अपने ऑटो में बैठाकर उसे छोड़ आते हैं। आरिफ गणपति मूर्ति को पहुचाने का किराया बिलकुल नहीं लेते, यानि ये सुविधा मुफ्त में देते हैं। पीएनएस से बात करते हुए आरिफ पठान कहते हैं कि वह गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को अपने ऑटों से अस्पताल भी फ्री में पहुंचाते हैं। ऐसा क्यों करते हैं… इस सवाल पर आरिफ पठान कहते हैं कि उन्हें ये काम करके दिली खुशी मिलती है, और एक शुकून हासिल होता है।

पीएनएस से बातचीत में उन्होंने बताया वो 4 साल से ये काम कर रहे हैं। उन्हें ख़ुशी मिलती हैं, जब छोटे छोटे बच्चे हँसते, खेलते, कूदते ऑटो के सामने नाचते गाते हैं। पीएनएस से बातचीत में आरिफ पठान महाराष्ट्र सरकार के ऑटो के नए कानून के बारे पूछने पर कहते हैं कि गरीबों के लिए ही सारे कानून बनाये जाते हैं। वह सवाल करते हैं, महाराष्ट्र में बहुत से हिस्सों में लोग मराठी नहीं बोल पाते, तो क्या ऐसे में उन्हें लाइसेंस नहीं मिलेगा। आरिफ पठान जैसे लोग ही इस मुल्क की असल बुनियाद हैं।